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भूत प्रेत की सच्ची कहानी

एक समय की बात है, मैं उस समय दिल्ली के बदरपुर नाम की जगह पर रहता था। उस समय मेरी उम्र 10–15 साल की बीच रही होगी। हमारी गली मे ही एक आंटी रहती थी और हम पूरी गली मे एक दुसरे को बहोत अच्छी तरह से जानते थे। उस समय हमारे मोहल्ले मे बिजली की बोहोत ज्यादा समस्या थी और रात के 8 बजते ही लाइट कट जाती थी और फिर रात को 12–1 बजे के बीच मे आती थी। खैर शाम तक वह दिन सामान्य सा था, हम सब गली के बच्चे छुपन छुपाई खेल रहे थे और खेल ख़तम होने के बाद हमें पड़ोस की ही एक आंटी ने सबको पार्टी मे बुलाया और उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी। हम सभी बच्चे तैयार हुए और उन आंटी के यहाँ गए, हमारे पड़ोस मे एक फैमिली रहती थी और उनके यहाँ तीन बेटियां थी, बड़ी लड़की का नाम मंजू था, बीच वाली लड़की का नाम संजू था और सबसे छोटी वाली बहन का नाम रिंकी था. उस समय पार्टी मे बस मैं मेरे और दोस्त और वो संजू नाम की लड़की भी थी। इस घटना मे आगे बढ़ने से पहले मैं अपने घर के आस पास की जगह का विश्लेषण दे दू । हमारी गली के अंतिम भाग मे एक छोटी सी पहाड़ी है और उसके बाद नाला और नाले के उस पार हरयाणा राज्य के गांव शुरू हो जाते थे और वह पहाड़ी बहोत पुर...

fake rape real story

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Fake Rape की एक सत्य घटना। एक 16 साल की लड़की अपने पिता पर बलात्कार का और उससे प्रेग्नेंट होने का आरोप लगाती है, F.I.R लिखी जाती है, लोअर कोर्ट मे केस चलता है, बाप को दोषी करार किया जाता है और 10 साल की कैद होती है, परिवार वाले लड़की के आरोप को चुनौती देने केस highcourt मे ले जाते हैँ, तब तक उस आदमी की सजा पूरी हो जाती है, आदमी की मृत्यु भी हो जाती है और 22 साल बाद highcourt से फैसला आता है की वो निर्दोष है, उस लड़की ने पिता के ऊपर ही झूठा आरोप लगाया था ये एक सत्य घटना है जो हमारे कानून का कमजोर पहलू बयां करती है, डिफेन्स के M.E.S मे इलेक्ट्रीशियन कपिल कुमार बैरी दिल्ली कैंट मे रहते थे, एक दिन 13 जनवरी 1996 को दिल्ली कैंट के पुलिस स्टेशन मे उन्ही की 16 वर्षीय लड़की ने कम्प्लेन की की उसका बाप उससे पिछले 5 साल से रेप कर रहा है और वो प्रेग्नेंट है। पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और कपिल कुमार को तुरंत अरेस्ट कर केस फ़ाइल किया,कपिल कुमार बोलते रह गये की वो बेकसूर हैँ, डीएनए टेस्ट करवा ले पर कोर्ट ने उनकी एक ना सुनी लोअर कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई कपिल कुमार को। परिवार मे उनकी बीवी उनके लड़को को ये ...

मोबाइल का पिन

#समय_हो_तो_जरूर_पढ़ें … ट्रैन के कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की पिन है??" उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था, और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और सीट के नीचे से अपना बैग निकालकर उसके टूल बॉक्स से पिन ढूंढकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी। थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??" वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। और एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी। लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों?? मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना" लड़की बुदबुदाई  "ओह्ह "...

नेत्रदान एक कहानी

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*जन्मदिन  का  उपहार* मैं सुचित्रा, आज मेरा जन्मदिन है। सचिन ने सुबह ही कहा :- "आज कुछ बनाना नहीं। लंच के लिए हम बाहर चलेंगे। तुम्हारे जन्मदिन पर आज तुम्हें एक अनोखी ट्रीट मिलेगी।" 15 साल हो गए हमारी शादी को। मैं सचिन को बहुत अच्छे से जानती हूँ। दोनों बच्चे शाम 4 बजे स्कूल से लौटेंगे यानी लंच पर मैं और सचिन ही जाएँगे और बच्चों के आने से पहले लौट भी आएँगे। एक नए बने मॉल की पार्किंग में हमारी गाड़ी पहुँची।  5वी मंजिल पर खाने पीने के ढेरों स्टॉल्स थे  फाइनली एक बंद द्वार पर हम पहुँचे। द्वार पर एक बोर्ड लगा था, जिसपर लिखा था : “Dialogue in the dark” मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। "अंधेरे में संवाद" ? ये कैसा नाम है, रेस्टॉरेंट का ? बड़ा विचित्र लग रहा था सब कुछ।  अगले मोड़ के बाद इतना अंधेरा हो गया कि, मैंने सचिन का हाथ पकड़ लिया और  फिर शायद हम एक हॉल में पहुँचे।   एक सूटबूट धारी आदमी ने किसी को आवाज लगाई :- "संपत।" “ये आज के हमारे स्पेशल गेस्ट हैं। आज मैडम का बर्थडे है। गिव देम स्पेशल ट्रीट। ऑर्डर मैंने ले लिया है, तुम इन्हें इनकी टेबलपर लेकर जाओ। अब उस दू...

क्योंकि मैं रिस्क नहीं लेता

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कभी भी शराब पीते हुए रिस्क नहीं लेता। . . . . मैं ऑफिस से शाम को घर पे आया तो बीवी खाना बना रही थी। हाँ, मुझे रसोई से बर्तनों की आवाज़ आ रही है। मैं छुपके से घर में घुस गया काले रंग की अलमारी में से ये मैंने बोतल निकाली शिवाजी महाराज फ़ोटो फ्रेम में से मुझे देख रहे हैं पर अब भी किसी को कुछ पता नहीं लगा क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता। . . . . . . . मैंने पुरानी सिंक के ऊपर वाली रैक से गिलास निकाला और फटाक से एक पेग गटक लिया। गिलास धोया, और उसे फिर से रैक पे रख दिया। बेशक मैंने बोतल भी अलमारी में वापस रख दी शिवाजी महाराज मुस्कुरा रहे हैं . . . . . मैंने रसोई में झांका बीवी आलू काट रही है। किसी को कुछ पता नहीं चला के मैंने अभी अभी क्या किया क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता। . . . . . मैं बीवी से पूछा: चोपड़ा की बेटी की शादी का कुछ हुआ ? बीवी : नहीं जी, बड़ी ख़राब किस्मत है बेचारी की। अभी लड़का देख ही रहे हैं वो लोग उसके लिए। . . . . . मैं फिर से बाहर आया, काली अलमारी की हलकी सी आवाज़ हुई पर बोतल निकालते हुए मैंने बिल्कुल आवाज़ नहीं की सिंक के ऊपर वाली पुरानी रैक से मैंने गिलास निकाला ...

वास्कोडिगामा क्या सच मे हीरो ?

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मैं उन्हें अपनी शक्ति का एहसास दिखा चुका हूं जब राजा ने ने मुझे एक दूत भेजा तो मैंने उसके होंठ काट कर और उसके कान की जगह अपने जहाज के कुत्ते के कान लगाकर, उसको लोहे के बिस्तर पर बिठा कर वापस भेज दिया वे अब सदैव के लिए हमसे भय खाएंगे. जिस समय वास्कोडिगामा भारत आया था तब पुर्तगाल जाकर उसने अपने राजा को ऊपर लिखी बातें बताई थी यह बातें ही इस बात का सबूत है कि भारत में आकर उसने कितनी क्रूरता दिखाइ। भारत में कभी भी वास्कोडिगामा के बारे में नहीं बताया जाता, किताबों में लिखा होता है कि वास्को डी गामा ने भारत की खोज की. ये पढ़ कर ऐसा लगता है जैसे वास्कोडिगामा बहुत बड़ा खोजकर्ता और महान समुद्री पायलट था लेकिन वास्तविकता इससे बहुत उल्टी हुई थी तो हमारे सामने तीन मुख्य सवाल है जिसमें से पहले पहले सवाल है  वास्कोडिगामा भारत क्यों आया था? रोमन काल से ही यूरोप और मध्य एशिया भारत से आने वाले मसालों के बहुत बड़े शौकीन थे काली मिर्च, दालचीनी और इस तरह के अनेक स्वाद बढ़ाने वाले और औषधीय कारणों से इस्तेमाल होने वाले मसालों का एक बहुत बड़ा व्यापार यूरोपियन लोगों से होता था. भारत के मसाले इतने महत्वपूर्...

खतरनाक बदला

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यह बदला मैंने अपनी छोटी बहन से लिया था। बहुत समय पहले की बात है जब मैं 12 साल की और मेरी बहन 10 साल की रही होगी। उसकी एक आदत थी जो भी मुझे पसंद होता था वह उसे छीन लिया करती थी जैसे जब भी मुझे थाली परोसी जाए वह उसे लेकर कहती थी मैं खाऊंगी या कभी पिताजी कुछ लाकर मुझे दें तो वह मुझे लेने नहीं देती थी और कहती थी मैं लूंगी। एक दिन मैंने अपनी मां से शिकायत की तो उन्होंने मुझे समझाया कि वह छोटी है और उसे लगता है कि तुझे हम जो भी देते हैं वह बेहतर है इसीलिए वह उसे छीन लेती है। सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं भी क्या करती मेरी मजबूरी थी। फिर एक दिन वह आया जिस दिन हमारे घर घूमने गांव से बूढ़ी काकी आई। वह हमें बहुत प्यारी थी और हमें ढेर सारी चॉकलेट देती थी पर उनकी एक बुरी आदत थी रात को सोते वक्त वह बहुत धमाका किया करती थी। मुझे खुराफात सूझी और मैं चिल्लाने लगी मुझे सोना है काकी के साथ और यह देख मेरी बहन ने भी जिद करना शुरू कर दिया की मैं सोउंगी काकी के साथ। मैंने ज्यादा जिद नहीं की और मुस्कुराते हुए अपने कमरे में वापस आ गई अगले दिन सुबह मैंने देखा मेरी बहन की आंखें सूजी हुई है और ...