वास्कोडिगामा क्या सच मे हीरो ?
मैं उन्हें अपनी शक्ति का एहसास दिखा चुका हूं जब राजा ने ने मुझे एक दूत भेजा तो मैंने उसके होंठ काट कर और उसके कान की जगह अपने जहाज के कुत्ते के कान लगाकर, उसको लोहे के बिस्तर पर बिठा कर वापस भेज दिया वे अब सदैव के लिए हमसे भय खाएंगे.
जिस समय वास्कोडिगामा भारत आया था तब पुर्तगाल जाकर उसने अपने राजा को ऊपर लिखी बातें बताई थी यह बातें ही इस बात का सबूत है कि भारत में आकर उसने कितनी क्रूरता दिखाइ।
भारत में कभी भी वास्कोडिगामा के बारे में नहीं बताया जाता, किताबों में लिखा होता है कि वास्को डी गामा ने भारत की खोज की. ये पढ़ कर ऐसा लगता है जैसे वास्कोडिगामा बहुत बड़ा खोजकर्ता और महान समुद्री पायलट था लेकिन वास्तविकता इससे बहुत उल्टी हुई थी
तो हमारे सामने तीन मुख्य सवाल है जिसमें से पहले पहले सवाल है वास्कोडिगामा भारत क्यों आया था?
रोमन काल से ही यूरोप और मध्य एशिया भारत से आने वाले मसालों के बहुत बड़े शौकीन थे काली मिर्च, दालचीनी और इस तरह के अनेक स्वाद बढ़ाने वाले और औषधीय कारणों से इस्तेमाल होने वाले मसालों का एक बहुत बड़ा व्यापार यूरोपियन लोगों से होता था. भारत के मसाले इतने महत्वपूर्ण थे कि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मिस्त्र के राजाओं ने जिन्हें फराओं कहा जाता था अपने लिए जो मम्मी बनाते थे उनमें भारत से लाई जाने वाली वाली काली मिर्च का उपयोग कीटाणु नाशक के रूप में होता था.
जब रोमन काल अपने चरम पर था तब एक बड़ी संख्या में धन भारत को जाया करता था और रोमन साम्राज्य के बड़े-बड़े चिंतक इस चीज से परेशान थे कि भारत को बहुत ज्यादा धन मसालों की कीमत के रूप रूप में चला जाता है, पहले जिन रास्तों का उपयोग भारत से मसाले लाने के लिए किया जाता था उनमें सबसे प्रसिद्ध था भारत के मालबार तट से लाल सागर होते हुए यूरोप जाना
बीच में जो भी राज्य पडते थे यूरोप वासियों को उन राजाओं को कर देना होता था जब रोमन साम्राज्य अपने चरम पर था तब इजिप्ट पर रोमन लोगों का कब्जा हो चुका था और भारत से आने वाले सभी मसाले इजिप्ट, अरब प्रायद्वीप से होकर यूरोप पहुंचते थे
रोमन लोग इससे एक बड़ी आय करते थे लेकिन धीरे-धीरे रोमन साम्राज्य का पतन हो गया और जब रोमन साम्राज्य गिरा उसकी जगह अरब और इजिप्ट में मुस्लिम शासक आ गए. अब भारत से आने वाले सभी मसाले इन मुस्लिम शासकों के राज्यों में से होकर जाते थे और इस तरह मुस्लिम शासक इससे होने वाली आय से लाभान्वित हो रहे थे लेकिन पुर्तगाल,स्पेन,जर्मनी और इटली बड़े राज्य थे और यह सभी ईसाई राज्य भी थे.
ईसाई लोग मुसलमानों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझते थे पुर्तगाल से तो इस्लाम की दुश्मनी इतनी गहरी थी कि हर एक मुसलमान को 1227 ईस्वी में पुर्तगाल से निकाल दिया गया था वे इस्लाम को अपना धुर विरोधी मानते थे क्योकिं पुर्तगाली लोग ईसाइयत पर विश्वास करते थे तो इस्लाम और पुर्तगाल के टकराव को वह भगवान और दानव के बीच का टकराव देखते थे.
यूरोप में उस समय एक कहावत प्रसिद्ध थी कि दूर दक्षिण पर एक महान इसाई साम्राज्य है जिसका राजा रोमा है पुर्तगाल के लोगों को लगा कि यदि वह किसी तरह उस राज्य तक अपनी बात पहुंचा दें तो ईसाई होने के नाते वह पुर्तगाल की मदद करेगा और इस्लाम को खत्म करके अरब को पुर्तगाल के कब्जे में ला देगा जिससे पुर्तगालियों को और ईसाइयत को बहुत फायदा होगा. क्योंकि तब उन्हें भारत से आने वाले मसालों पर टैक्स नहीं देना होगा इन सब बातों के होते हुए पुर्तगाल के राजा ने तय किया कि वह अपना एक नौसेना का बेड़ा दूर दक्षिण में पुर्तगाल ईसाइयत के महान राजा के पास भेजेगा और वहां से भारत भी जाएंगे जहां से मसालों का व्यापार करेंगे.
जब वास्कोडिगामा अपना काफिला लेकर पुतला पुर्तगाल से चला तब उसके केवल दो मकसद थे
- पहला भारत जाने का विकल्प ढूंढना
- दूसरा उस महान ईसाई साम्राज्य को खोज निकालना.
उसका पहला मकसद ही कामयाब हो पाया क्योंकि निश्चित रूप से ऐसा कोई महान राज्य था ही नहीं.
लेकिन जब वास्कोडिगामा भारत आया था वह भारत के मालबार तट के कालीकट शहर में उतरा जहां का राजा जमोरिन था
जिस समय जमोरिन वास्कोडिगामा को भारत के मंदिरों में लेकर गया तो वास्कोडिगामा को लगा कि उसने महान इसाई साम्राज्य खोज लिया है और वह हिंदू मंदिरों को चर्च समझ बैठा पुर्तगाली लोग भारत के भव्य कल्चर से इतने ज्यादा प्रभावित हुए की जब उन्होंने देखा तो उन्हें चारों चारों तरफ सोने के सिक्के और बहुमूल्य हीरे और रतन देखने को मिले.
जब वास्कोडिगामा ने अपने साथ लाए हुए उपहार जमोरिन को भेट देनी चाहिए तब जमोरिन किए मंत्रियों ने यह कह के उपहार लेने उपहार लेने से मना कर दिया कि
जो आप दे रहे हैं यह उपहार के लायक ही नहीं है यह लेकर हम अपने राजा की राजा की बेज्जती नहीं करेंगे
वास्कोडिगामा ने भारत में 3 महीने तक व्यापार किया, शुरू में उसका व्यापार नहीं चला क्योंकि वह एक पुर्तगाली था और मुसलमानों ने उसकी चीज नहीं खरीदी बाद में जब वह कालीकट से आगे गया तब उसका थोड़ा बहुत सामान बिका वह भी बहुत मामूली कीमतों पर इतनी मामूली कीमत होने के बावजूद भी वास्कोडिगामा ने अपनी लागत से 60% फायदा कमाया जिस समय वास्कोडिगामा जा रहा था उस समय राजा जमोरिन के सैनिकों ने वास्कोडिगामा से चुंगी कर मांग की जिस पर वास्कोडिगामा और जमोरिन सैनिकों में एक छोटी सी सी मुठभेड़ हुई वास्कोडिगामा पहली बार में ही ही अपने साथ 10 भारतीयों को बंधक बनाकर ले गया था लेकिन यह केवल यूरोपियन लोगों की धोखेबाजी की शुरुआत भर थी.
जब वास्कोडिगामा वापस अपने देश गया गया तब अपने राजा के दरबार में वास्कोडिगामा ने जो कहा वह निम्न है
सुदूर दक्षिण के इसाई लोग अभी इतने मजबूत नहीं है पर जब हम उनका विश्वास ईसाईयत पर बना देंगे तब वह हमारे लिए मुसलमानों से लड़ने का एक बड़ा अवसर पैदा करेंगे और भगवान की कृपा रही तो आज जो व्यापार मुसलमानों के हाथ में है कल वह व्यापार हमारे भाइयों के हाथ में होगा और हम ईसाइयात का आनंद उठा रहे होंगे
वास्कोडिगामा के बाद एक कैब्राल नाम का पुर्तगाली भारत आया था वह भी भारत से काफी धन कमाकर गया और कुछ हद तक तबाही भी कि लेकिन ये सवाल वास्कोडिगामा के संदर्भ में है तो मैं कैब्रल की करतूत यहां से हटा देता हूं.
1502 में वास्कोडिगामा एक बार फिर से 15 जहाजों के साथ भारत आया वास्कोडिगामा समझ चुका था कि पुर्तगाल से माल बार तक कोई भी शक्तिशाली राज्य नहीं है जो उसकी नौसेना को रोक सके.
जिस समय वास्कोडिगामा भारत आ रहा था रास्ते में उसे मक्का से आता हुआ एक जहाज मिला जिसमें मक्का मदीना के दर्शन कर के लौट रहे लोग शामिल थे वास्कोडिगामा ने वो पूरा जहाज लूट लिया और अपने लोगों को आदेश दिया कि जहाज को गन पाउडर पाउडर से जला दिया जाए उस वक्त उस जहाज में 380 पुरूष और इतनी ही औरते और बच्चे शामिल थे जिस समय यह जहाज जलाया जा रहा था जहाज में मौजूद औरतें अपने गहने हाथ मे लेकर उन्हे हिला हिला कर पुर्तगालियों की तरफ इशारा कर रही थी मतलब की वह पुर्तगालियों से कहना चाह रही थी कि उनकी संपत्ति ले लें बस उनकी जीवन बख्श दें पर पुर्तगालियों ने वह पूरा जहाज उन सभी आदमियों के साथ जला दिया सभी लोग जलकर और पानी में पानी में डूब कर मर गए .
यह सब करने के बाद जब पुर्तगाली जहाज जमोरियन के राज्ये मे आया तब तक जमोरियन को मक्का के जहाज के साथ हुआ हादसा पता चल चुका था अपने शाक्तिशाली नैवी के दम पर वास्कोडिगामा ने कहा की
पुर्तगालियों के पास काली मिर्च का व्यापार में एक अधिकार है और जमुरियन यह अधिकार अरब के लोगों को नहीं दे सकता, अगर जमुरिया ने उनकी शर्त नहीं मानी तो हमारे जहाज़ अपनी तोपों से अगले दिन कालीकट पर बमबारी करेंगे.
लेकिन पुर्तगाली यहां पर ही नहीं रुके थे कलीकट से व्यपार कर वापस आने वाली उन्होंने छोटी-छोटी कई सारी नाव पकड़ ली और उनके क्रु और उस नाव में सवार लोगों को भी पकड़ लिया गाया था अपनी बात मनवाने के लिए वास्कोडिगामा ने एक बहुत ही निर्दय चाल चली। 1 नवंबर 1502 की रात्रि को वास्कोडिगामा ने बंधक बनाए हुए लोगों को फांसी पर लटकाना शुरू किया 34 बेगुनाह लोग जो भारत में केवल व्यपार करने आये थे को फांसी पर लटका कर मार दिया गया जब फांसी पर लटका के लोगों को नीचे उतारा जा रहा था तब पुर्तगाली हर एक व्यक्ति की लाश का सर दोनों पैर और दोनों हाथ काट दे रहे थे लाश के टुकड़ों को नाव में रखकर दोबारा से कालीकट के तट पर भेज दिया जाता था जिस पर एक संदेश लिखा था
हम से टकराने वालों को इससे भी बुरी मौत मिलनी चाहिए.
यह नाव थोड़ी दूर जाकर समुद्र में पलट जाती थी और इन्सानी मांस के कटे हुए टुकड़े समुद्र की लहरों के साथ कालीकट शहर में बिखर जाते थे अगले दिन वास्कोडिगामा ने कालीकट पर बमबारी कर दी. भारतीय राजा इन सब चीजो के लिऐ तैयार नही थें पिछले पाँच हजार सालों से भारत में अलग अलग देशों के जाहाज आते थे और व्यपार करते थे किसे ने भी कभी इतनी क्रुर्ता नही दिखाई थी, भारत के राजाओ के पास केवल छोटी छोटी नौकाऐ थी जो केवल सुरक्षा और चुगीं वसुलने के उद्देश्य से बनाई गयी थी उस समय के भारतीय राजाओं के पास कोई मजबूत नौसेना नहीं थी इसलिए वह वास्कोडिगामा का जवाब नहीं दे सके. कालीकट ने एक भयंकर तबाही देखी है जो शहर व्यपारीयों के लिऐ स्वर्ग था वो शहर आग कि लपटों मे छुप गाया. वास्कोडिगामा अपने छह जहाजों को कालीकट पर तबाही मचाने के लिए छोड़कर खुद कोचिन चला गया क्योकिं उसे इस युध्द कि भरपाई भी करनी थी, तब तक कोचिन के मुस्लिम व्यपारियों को पता चल चुका था कि कैसे वास्कोडिगामा ने कलीकट में नरसंहार किया हैं उसके आने से पहले ही कोचिन से मुस्लिम व्यपारी गायब हो गये और ये ही वास्कोडिगामा चाहता था।
जिस समय वास्कोडिगामा कोचिन में था उस समय उसके पास एक हिंदू ब्राह्मण आया जो जमोरिन राजा एक संदेश लेकर वास्कोडिगामा के पास पहुंचा था वास्कोडिगामा ने उससे पहले तो लोहे की गर्म सलाखों के साथ उसके शरीर को दागा दिया जब हिंदू ब्राह्मण ने अपने आप को आत्महत्या करके मारने का प्रस्ताव दिया तब वास्कोडिगामा ने कहा कि
मुझे कोई चाहिए जो मेरा संदेश राजा तक पहुंचा सके उसने उस ब्राह्मण के दोनों होंठ काट दिए उसके कान काट दिए और कान के स्थान पर अपने कुत्ते के कानों को सील दिया गया इस हालात में उस ब्राह्मण को जमोरिन राजा के पास भेजा गया.
वास्कोडिगामा ने कोचिन और माल बार तट पर इतनी भयंकर तबाही मचाई थी कि अधिकतर मुस्लिम व्यापारी दोबारा व्यापार करने के लिए कभी नहीं लौटे, पूरा का पूरा व्यापार तुरंत ही पुर्तगालियों के हाथ में चला गया।
पुर्तगालियों ने लगातार डेढ़ सौ सालो सालो तक इस व्यापार का लाभ उठाया और अपने आपको अमीर और अमीर करते गये. पुर्तगालियों को जब समझ आया कि माल बार तट पर कोई ईसाई राज्य नहीं है बल्कि हिंदू राज्य है तो वास्कोडिगामा ने जाते हुए अपने कई लोगों को यहां छोड़ दिया और ने आदेश दिया कि
हिंदू महिलाओं से शादी की जाए और इस देश का ईसाईकरण किया जाए.
अब आपने पूरा लेख पढ़ा है, क्या आप मुझे बताएंगे, क्या सच में वास्कोडिगामा भारत में व्यापार करने आया था?
इस प्रकार से कोई व्यापार किया जाता है? पहले दिन से ही यूरोपियन लोगों ने हम जैसे देशों की जनता पर अत्याचार की है अंग्रेजों ने जो किया उसका केवल 5% भाग के बारे में ही हमे बताया जाता है पर अंग्रेजों द्वारा किए गए हर एक काम की नींव पुर्तगालीयो ने रखी थी
क्या आप अब अपने आप को यह स्वीकार करने देंगे कि भारत की खोज वास्कोडिगामा ने की थी?
धन्यवाद
स्त्रोत। यह लेख द थेफ्ट ऑफ ऑफ इंडिया पुस्तक के पृष्ठ संख्या 1–21 से लिया गया है।
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