fake rape real story

Fake Rape की एक सत्य घटना।

एक 16 साल की लड़की अपने पिता पर बलात्कार का और उससे प्रेग्नेंट होने का आरोप लगाती है, F.I.R लिखी जाती है, लोअर कोर्ट मे केस चलता है, बाप को दोषी करार किया जाता है और 10 साल की कैद होती है, परिवार वाले लड़की के आरोप को चुनौती देने केस highcourt मे ले जाते हैँ, तब तक उस आदमी की सजा पूरी हो जाती है, आदमी की मृत्यु भी हो जाती है और 22 साल बाद highcourt से फैसला आता है की वो निर्दोष है, उस लड़की ने पिता के ऊपर ही झूठा आरोप लगाया था

ये एक सत्य घटना है जो हमारे कानून का कमजोर पहलू बयां करती है, डिफेन्स के M.E.S मे इलेक्ट्रीशियन कपिल कुमार बैरी दिल्ली कैंट मे रहते थे, एक दिन 13 जनवरी 1996 को दिल्ली कैंट के पुलिस स्टेशन मे उन्ही की 16 वर्षीय लड़की ने कम्प्लेन की की उसका बाप उससे पिछले 5 साल से रेप कर रहा है और वो प्रेग्नेंट है। पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और कपिल कुमार को तुरंत अरेस्ट कर केस फ़ाइल किया,कपिल कुमार बोलते रह गये की वो बेकसूर हैँ, डीएनए टेस्ट करवा ले पर कोर्ट ने उनकी एक ना सुनी लोअर कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई कपिल कुमार को।

परिवार मे उनकी बीवी उनके लड़को को ये फैसला मंजूर नहीं था, उन्होंने इस फैसले को चुनौती दी highcourt मे, 17 साल तक ये केस highcourt मे चलता रहा उसके बाद दिसंबर 2018 मे ये फैसला आया की कपिल कुमार निर्दोष हैँ। लेकिन फैसला आने के 6 महीने पहली ही कपिल कुमार की मौत हो चुकी थी।

अब आते हैँ की कपिल कुमार को निर्दोष क्यों बताया highcourt ने। highcourt की जांच के मुताबिक….

तो कपिल कुमार की छोटी लड़की जिसने ये आरोप अपने बाप पे लगाया था, वो किसी लड़के 15 साल की उम्र से प्यार करती थी। वो स्कूल बंक करके उस लड़के के साथ रहती थी जब ये बात कपिल को पता चली तो उन्होंने उस लड़के को धमकी दी और चाणक्यपुरी थाने मे उसके खिलाफ नाबिलग बेटी को फसा कर उसका शारीरिक शोषण करने की कम्प्लेन भी की, लेकिन पुलिस ने उसको डरा धमका कर जाने दिया, फिर से उनका वैसा ही चलता रहा लड़की के शारीरिक सम्बन्ध बने उस लड़के से और वो प्रेग्नेंट हो गयी। जब ये बात लड़की ने उस लड़के को बताई तो वो लड़का दिल्ली से भाग गया, अब लड़की को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे उसकी उम्र उस समय सिर्फ 16 साल ही थी, बहुत सोचने के बाद उसने अपने बाप के खिलाफ साजिश रची ताकि वो उसके द्वारा किये हुए कुकृत्य से बच जाये और लोग उसकी तरफ ऊँगली ना उठा सके। और भी कई ऐसे पहलू मिले कोर्ट को की उन्हें कपिल कुमार को निर्दोष घोषित करना पड़ा।

अब सवाल ये उठता है की कपिल कुमार दोषी ना होते हुए भी सजा काटी, इतना बड़ा आरोप लेकर वो सारी उम्र झेलते रहे, मरने तक वो इस आरोप से बरी नहीं हो पाए, उनका सामाजिक जीवन ही ख़तम हो गया वो कैसे जिये होंगे इस आरोप के साथ की उनकी लड़की ने उनपे रेप का आरोप लगाया है। highcourt ने लोअर कोर्ट के इस जजमेंट के लिये फटकार लगायी और इसे miscarriage of justice कहा, और कपिल कुमार के लिये खेद प्रकट किया।

ये घटना सुनकर मेरे होश उड़ गये गुस्सा और खीझ हुई अपने कानून के प्रति, की एक गलत फैसले ने कोर्ट ने खुद अपराध कर दिया अब कोर्ट को सजा क्यों नहीं मिल रही है, और लोअर कोर्ट ने इसकी जांच क्यों नहीं कराई, उन्होने बच्चे का डीएनए क्यों नहीं कराया, पुलिस और कोर्ट ने बस इतना सोचा की एक लड़की क्यों झूठ बोलेगी की उसके बाप ने ही उसका बलात्कार किया है बस इसी तथ्य पे उन्होंने सजा सुना दी, जबकि कपिल कुमार हर सुनवाई पे यही बोलते रहे की वो निर्दोष हैँ डीएनए जाँच कराई जाये, लेकिन लोअर कोर्ट ने उनकी ना सुनी और एक निर्दोष को सजा के साथ पूरी उम्र आरोप के साथ जीनी पड़ी।

इस घटना से पता चलता है की कानून अंधा क्यों है।

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