हिन्दू धर्म के अनुसार सावन के महीने में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए,
सावन में दूध नहीं पीना चाहिए, यह बात सही है, कुछ लोग कहते हैं कि कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए। हिन्दू धर्म के नियमों के मुताबिक सावन में दूध ना पीने की सलाह दी गई है। कहीं-कहीं कहा जाता है कच्च दूध नहीं पीना चाहिये सावन में तो कहीं कहा जाता है दूध ही नहीं पीना चाहिए। देखते हैं वास्तविकता क्या है नियम -
कच्चा दूध सावन में भगवान शिव को अर्पित किया जाता है इसलिए सावन में इनका सेवन करने से बचना चाहिए।[1]
उस समय बुजुर्गों ने विज्ञान की जगह धर्म और आस्था से जोड़ दिया इसके कारण इसे धार्मिक मान्यता मिल गई, बाद में विज्ञान के बढ़ने के साथ इस पर शोध कर इसके पीछे वैज्ञानिक कारण दिए गए। ऐसे में यह नियम भी उस समय बना जब विज्ञान की बजाय धार्मिक नियम सर्वोपरि थे तो धर्म और आस्था जोड़ दी।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
चित्रः दूध
डॉक्टर तो सावन क्या किसी भी महीने में कच्चा दूध पीने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि कच्चा दूध पीने से ब्रूसेलोसिस नाम की जानलेवा बीमारी हो जाती है।[2] इसके साथ ही बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने के कारण विशेष तौर से सावन में दूध नहीं पीने की सलाह देते हैं।
भारतीय आयुर्वेद और सावन में दूध का सेवन -
इसी विषय पर आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रमाकांत शर्मा का कहना है कि सावन में दूध न पीने की सलाह आयुर्वेद में दी गई है। सावन में बारिश के कारण जगह जगह कीड़े मकोड़े घूमते रहते हैं। ऐसे में गाय हरे घास के साथ कई कीड़े मकोड़े भी खा जाती है, जिससे गाय के दूध में हानिकारक तत्व मिल जाते हैं। ऐसे में जब उस दूध का सेवन हम करते हैं तो कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है। वहीं अक्सर मॉनसून में लोगों का इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है। इसके कारण दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन पेट संबन्धी तमाम समस्याएं जैसे अपच, गैस, एसिडिटी, उल्टी, दस्त आदि तमाम उत्पन्न कर देता है। इसलिए इस माह में दूध और दूध से बनी चीजों को लेने के लिए मना किया गया है। इस कारण सावन में दूध दही का उपयोग कम करना चाहिए।[3]
सावन में दूध का सेवन नहीं किए जाने के वैज्ञानिक कारण -
- सावन में दूध का उपभोग करने से पित्त की समस्या हो सकती है।
- समय में दूध के सेवन से वात बढ़ता है, जिसके कारण बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए सावन में दूध नहीं पीना चाहिए।
- सावन में दूध में कीड़े लग सकते हैं, जिससे बीमारी हो सकती है।
वैज्ञानिक कारणों से ही धार्मिक मान्यताओं में किसी वस्तु के उपभोग की मनाही होती है। दूध के अतिरिक्त धार्मिक मान्यताओं में कई प्रकार की हरी सब्जियों का का उपभोग वर्जित है, जिसका कारण भी सावन में उनमे कीड़ों की अधिकता से किसी बीमारी के होने का अंदेशा है।
विशेष -
सावन में दूध के उपभोग की मनाही होने से लोग सावन में दूध का अभिषेक भगवान शिव को कर देते थे, जिससे इस मान्यता को बल मिला कि सावन में भगवान शिव के आदेश से दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जबकि सत्यता उपभोग नहीं करने से अभिषेक किया जाना है।
धन्यवाद..
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