बीवी से को नही डरता है ।

एक कहानी

एक राजाने एक सर्वे करने का विचार किया।

अपने राज्य की घर गृहस्थी कौन चलाता है,

बीवी या

ख़ुद पति,,,,

उस के लिए उसने ईनाम घोषित किया,

जिसका घर पति के इशारे पे चलता है, उसको एक उमदा घोडा ईनाम दिया जाएगा,

और जिसका घर बीवी के इशारे पे चलता है, उसे एक सेब ईनाम मिलेगा,

फिर राजमहल में लंबी कतार लगती गई।

हरेक व्यक्ति आता और चुपचाप दिया हुआ ईनाम याने कि सेब ले कर मुंह लटकाए हुए चलता बनता।

इधर राजा को चिंता लगी रही क्या है ये अपने राज्य की दशा, इतना महापराक्रमी मै और मेरे राज्य के लोग ये ऐसे?

बीवी के इशारे पर नाचने वाले।

सेब के पिटारे के पिटारे खाली हो गये पर कोई माई का लाल घोड़ा लेने नहीं आया।

इतने में दूर से धूल उड़ती दिखाई दी। एक हट्टा कट्टा बड़ी बड़ी मुंछो वाला रोबीला पहलवान टाइप का आदमी दरबार में मुखातिब हुआ और बोला, महाराज, मुझे दीजिए घोड़ा, मेरे घर में मेरा ही हुकुम चलता है।

ये सुनकर राजा बहुत खुश हुआ। अपने मंत्री के पास देख कर मुछो पर ताव देते हुए बोला जा, अस्तबल से तुझे जो पसंद है वो घोड़ा ले के जा।

नेत्रदान ( एक प्रेरक कहानी अंगदान को प्रेरित करती)

राजा मन ही मन बहुत खुश हुआ, साला एक तो गबरू जवान मिला जिसके इशारे पे घर चलता है।

इधर ये पहलवान काला घोड़ा ले के चला, राजा ने उसे खुशी खुशी गले का कंठा भेट कर दिया।

थोड़ी ही देर में वो घोड़ा ले के वापस आ गया।

राजा:- क्या पहलवान, का हुआ, वापस क्यों आ गए❓

पहलवान :- मेरी बीवी बड़ी सुघड़ और समझदार है, कहती है काला रंग अशुभ होता है और सुफैद अच्छा, तो तुम सफेद घोड़ा ले कर आओ।

राजा गुस्से में आ गया, ला उस घोड़े की लगाम इधर। वो सेब उठा और चलता फिरता नज़र आ।

इस तरह दिन खत्म हुआ। शाम की ओट में पंछी घोसलो में उनिंदे हुए और दरबार बरखास्त हुआ।

पर राजा के पेशानी के बल कुछ कम नहीं हुए। इतने में घर गया प्रधान वापिस आया और राजा से कहा, खाविंद एक बतियानी थी।

आपने जो ईनाम रखा है उसके बनिस्बत सोने के सिक्के या दो गाड़ी अनाज ऐसा ईनाम रखते तो ये झंझट न होती। पहलवान भी खुश हो गया होता और आप भी।

राजा : प्रधानजी, मैं भी कुछ ऐसा ही सोचा था

पर रानी सरकार ने कहा घोड़ा ही देना ईनाम में।

तो फिर क्या? घोड़ा ही देना पड़ा।

👊🤛👊🤛😏😏😡😡😂😂😂😂

😔😔

लकीर के फ़क़ीर बंदर (एक मजेदार कहानी)

प्रधानजी:- 🧐🧐 प्रभु, सेब वैसे ही खाएंगे या काट कर मंगाऊ ❓🤪🤪

अब राजा की भी हंसी फूट गई, हंसते हंसते बोले, प्रधान जी, कल ना बता सकते ये बात दरबार में, जो इतनी रात को चले इधर?

प्रधानजी:-

क्या कहूं महाराज, बीवी ने कहा अब्बी जा के पूछ के आना, नक्की करो इस बात को…..

राजा: सेब यही खाते के घर ले के जाते ?

🤗😁😂

बजरंगबली का प्रत्यक्ष आशीर्वाद ( सच्ची घटना )

सार ऑफ द स्टोरी...

तो भय्यन,

समाज कितना भी पुरुष प्रधान हो, होगा वही जो आपका गृहमंत्री चाहेगा। संसार पितृसत्ताक है, औरतें अबला नारीयां है ऐसी फलां फलां की असंभव बातें दिमाग़ से निकाल दिजिए। ऐसी अफवाहों पर बिवी के कहने पर ही विश्वास करे। आई समझ?

😀😁😂

अपना सेब यही खा ले। वो वहां पडी है टोकरी।


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