बजरंग बली का प्रत्यक्ष आशीर्वाद अथवा चमत्कार

इसे मैं बजरंग बली का प्रत्यक्ष आशीर्वाद अथवा चमत्कार नहीं तो और क्या कहूं ?



सन १९८८-८९ की बात है ! मेरी अवस्था कोई सात-आठ वर्ष की रही होगी ! मेरे एक दांत में कुछ समय से दर्द था जिसका इलाज हमारे घर से कोई दो किलोमीटर दूर एक डेंटल सर्जन डॉ बी डी अहुजा के पास चल रहा था ! एक दिन डॉ ने मेरे दांत का x-Ray किया व् निष्कर्ष निकाला कि उस दांत को निकालने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं है कि वो दांत इस हद तक खराब हो चुका था ! x-Ray में देखने से ही दांत की अवस्था बहुत खराब दिखाई पड़ती थी !

उसी रात.. कोई 11 बजे के आसपास का समय रहा होगा ! घर में सभी खा-पी कर सोने जा चुके थे ! अचानक ही मेरे दांत में तीव्र वेदना का अनुभव होने लगा ! ये वेदना वही समझ सकता है जिसने दांत के दर्द को अनुभव किया हो ! कुछ समय तक मैं यू ही लेटा रहा ! किन्तु, दर्द की बढ़ती तीव्रता ने मुझे रोने पर मजबूर कर दिया !

मां-पिताजी उठ कर बैठ गए थे ! मां ने मुझे गर्म चाय बना कर दी, जिसके सेंक से मुझे अक्सर आराम मिल जाया करता था ! दर्द की दवा भी दी गयी किन्तु सब बेकार ! मारे दर्द के मैं बहुत बुरी तरह छटपटाने लगा था अब तक ! तब मोबाइल फ़ोन या अन्य ऐसे साधन नहीं हुआ करते थे कि डॉ से संपर्क साधा जा सके ! उनका लैंड लाइन नंबर था, किन्तु क्लिनिक का, जो कि उस समय खुला होने का कोई प्रश्न ही नहीं था !

दर्द अब तीव्र से तीव्रतम होता जा रहा था !

मेरे पिताजी सदा से हनुमान जी के उपासक रहे हैं ! उनकी देखा-देखि मैं भी बजरंग बली को ईष्ट मानने लगा था ! हमारे घर का मंदिर दीवार में बनी अलमारी के एक आले में बना रखा था, जिसमें लाल रंग की हनुमान जी की कोई एक फुट की प्रतिमा रखी हुई थी, जिसे मैं बचपन से देखता आ रहा था ! वह मूर्ती ही मेरे लिए हनुमान जी का स्वरुप थी !

दर्द जब सहन-शक्ति की सीमा से पार हो गया तो मैं बिस्तर पर बुरी तरह छटपटा रहा था ! कोई अन्य उपाय न देख पिताजी ने मुझे गोद में उठाया और जाने किस प्रेरणा के वशीभूत मुझे मन्दिर के नीचे लेटा कर हनुमान जी का ध्यान करने को कहा ! दर्द ऐसा लग रहा था मानो कील ले कर उसे कोई मेरे दांत में हथौड़े से ठोक रहा हो ! अब.. मैंने अपने आपको पूरी तरह हनुमान जी के हवाले कर दिया ! किंचित क्रोध में, मैंने उनसे कहा भी कि हे बजरंग बली.. मैंने आपका क्या बिगाड़ा है जो मुझे इतना कष्ट दे रहे हो ? पता नहीं कब, और हनुमान जी का ध्यान करते के दौरान ही वहीं फर्श पर मुझे नींद आ गयी ! पिताजी ने, कहीं उठ कर फिर से रोने न लग जाऊं, ऐसा सोच मुझे वहीँ लेटे रहने दिया !

खैर, सबकी होती है तो उस रात की भी सुबह हुई ! दर्द से मुझे आराम था ! पिताजी पहली फुर्सत में ही मुझे ले कर डॉ बी डी आहूजा के पास पहुंचे और रात की सारी बात बताई ! डॉ ने दांत को ठोका.. बजाया, किन्तु मेरी ओर से कोई प्रतिक्रया न हुई ! गाल पर की सूजन भी गायब थी ! चेक करने हेतु मेरे दांत का एक और x-Ray लिया गया !

अगले दिन, जब हम रिपोर्ट लेने गए तो उसे दिखाते हुए डॉ के चेहरे पर अकथनीय अविश्वास के भाव विराजमान थे ! क्योंकि वो पहले से ही मेरा इलाज कर रहे थे, सो मेरे दांतों से वह मुझसे अधिक परिचित थे ! पिताजी के पूछने पर उन्होंने कहा - '' मैं हैरान हूँ कि x-Ray में दांत का खोखलापन बिलकुल भी नहीं दिख रहा ! जबकि 4 दिन पहले उसी दांत के लिए गए x-Ray में दांत का गड्ढा स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा था !'' खैर.. जब कोई बीमारी ही नहीं दिख रही थी तो दवा किस चीज की देते और किस चीज का तो इलाज जारी रहता ?

पिताजी के बहुत कहने पर भी, कि रात को इसी दांत में दर्द के कारण ये लड़का पूरी रात तड़पा है.. डॉ ने यह कह कर, कि ''जब कोई समस्या दिख ही नहीं रहे तो मैं इलाज किस चीज का करूं ?'' केवल एहतियातन दर्द-निवारक दे कर हमें वापस भेज दिया !

वो दिन है और आज का दिन, मुझे कभी उस दांत में दुबारा कोई समस्या नहीं हुई ! x-Ray तो प्रत्यक्ष प्रमाण होता है न ? तब.. इस घटना को आप क्या कहेंगे, जिस में केवल चार दिन के अंतर पर लिए गए एक ही दांत के दो भिन्न x-Ray दो अलग-अलग कहानी कह रहे हों ?

अब इसे मैं बजरंग बली का प्रत्यक्ष आशीर्वाद अथवा चमत्कार नहीं तो और क्या कहूं ?

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